अनजान सफर में मिला हमसफर: पार्ट 1

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सुबह की मंद- मंद ठंडी हवाओं को चीरती हुई एक कार तेज़ी से अपने मंजिल कि ओर बढ़ रही है।  कार में सवार दोनों लड़कियां नेहा और दीप्ति  बरसात के इस खुशनुमा सुबह से बेखबर किसी और ही सोच है। दीप्ति खिड़की से बाहर देख रही है तो नेहा की नजर अपने घड़ी पर है। वो टाइम देखती है और कार की स्पीड और बढ़ा देती है। शायद उन्हें कहीं पहुंचने की जल्दी है।

यूं कार कि स्पीड बढ़ने से दीप्ति का ध्यान अचानक टूटा।

यार, थोड़ा लिमिट में। कहते हुए उसने नेहा की अोर देखा।

ओह, तो मैडम यही है। मुझे लगा अभी से ही मिशन पर पहुंच गई। नेहा ने दीप्ति की आेर देखते हुए कहा।

नेहा की इस बात का दीप्ति ने कोई जवाब नहीं दिया और फिर से बाहर देखने लगी।

दीप्ति को यूं खोया खोया सा देख कर नेहा ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। “यार, ये अंडरकवर मिशन इतने भी मुश्किल नहीं होते जितना कि तू सोच रही है। अभी तेरा पहला मिशन  है ना इसलिए तू कुछ ज्यादा सोच रही है। डोंट थिंक टू मच। आई नो यू विल हैंडल एवरीथिंग वेरी वेल।  वैसे भी इन सब चीजों से लड़ना हम पुलिस ऑफिसर्स का रोज़ का ही तो  काम है। और फिर पहले ये भी तो डिसाइड हो जाने दे कि तीनों में से कौन से मिशन पे तुझे भेजा जा रहा है।” 

नेहा की लंबी बात समाप्त होने के बाद दीप्ति ने उसके तरफ देखते हुए थोड़ा मजाकिया अंदाज में कहा – अरे, वो सब तो ठीक है। ये बता हम ये केसेस और मिशंस के पीछे ही भागते रहेंगे या फिर कोई हमारे पीछे भी भागेगा।😜 कहकर जोर से हंसने लगी।

दीप्ति की बात सुनकर नेहा भी खिलखिलाने लगी और उसकी तरफ देखते हुए कहा ‘ मिलेगा, मिलेगा जानेमन। यु नेवेर नो किस सफर पे हमसफर मिल जाए।’

और दोनों एक बार फिर जोर से हंसने लगी।😃

नेहा ने हसतें हुए कहा यार, तेरा सेंस आफ ह्यूमर कमाल का है।

वैसे तो नेहा दीप्ति की सीनियर आफिसर है लेकिन इन दोनों के बीच जूनियर सीनियर जैसा कुछ भी नहीं है। दोनों कॉलेज टाइम से बेस्ट फ्रैंड्स है और 5 सालों के बाद भी उनके बीच कुछ नहीं बदला

जैसे ही दोनों ने हंसना बंद किया, दीप्ति ने अपनी घड़ी की ओर देखते हुए थोड़ी टेंशन में कहा यार, हम ऑन टाइम है ना?

” हां, बस पहुंचने ही वाले है 5 मिनट्स में।”

थोड़ी ही देर में वो दोनों हेड  ऑफिस के बाहर होती है।

मीटिंग इज गोईंग ऑन, दीप्ति ने अंदर की ओर झांकते हुए बाहर कुर्सी पे बैठते हुए कहा।

आज कई मिशंस अलॉट होने है ना, उनकी मीटिंग चल रही है। अभी अपनी पे टाइम है। कहते हुए नेहा ने दीप्ति को पानी का बॉटल पकड़ाया।

10-15 मिनट्स बाद अंदर से कुछ ऑफिसर्स निकल कर चले गए। और फिर थोड़ी देर में नेहा और दीप्ति को अंदर से बुलावा आ गया।

दोनों ने अंदर पहुंचते ही कहा –

मिस दीप्ति रिपोर्टिंग, सर

मिस नेहा रिपोर्टिंग, सर

‘ हैलो, ऑफिसर्स। प्लीज हव ए सीट।’ सीट्स की तरफ हाथ से इशारा करते हुए हेड आफिसर ने कहा।हेड आफिसर के अलावा वहां 3-4 और ऑफिसर्स भी थे। हेड आफिसर ने कुछ पेपर्स को देखते हुए कहा –

‘सो मिस दीप्ति, यू हैव टू गो ऑन पन्ना मिशन ‘ और उन्होंने पेपर्स में ही अपनी आखें गढ़ाए रखी। और दीप्ति ये सुनकर एक पल के लिए चौंक गई।😲 उसने नेहा की तरफ देखा तो नेहा ने आखों से रीलैक्स रहने का इशारा किया।

दीप्ति पन्ना तो कब से जाना चाहती थी लेकिन इस तरह से मिशन में जाने का मौका मिलेगा। ये तो उसने सपने में भी कभी नहीं सोचा था। एक पल के लिए उसे लगा कि किसी ने उसे उसकी सबसे प्रिय वस्तु बिना मागें ही उसे से दी। वो ख्यालों में ही खोई रहती यदि हेड आफिसर की आवाज़ उसके कानों में फिर से नहीं पड़ती।

मिस दीप्ति, इज देयर एनी प्रॉब्लम?

नो..नो सर, देयर इज नो प्रॉब्लम। इन फैक्ट, आई एम ग्लैड की मुझे ये मिशन अलॉट किया गया। दीप्ति ने हालात संभालते हुए कहा।

दीप्ति, यू आर फ्रॉम पन्ना। इसीलिए हमने आपको इस मिशन के लिए चूज किया। ये सुनकर दीप्ति एक बार फिर चौंक गई और मन में सोचने लगी कि इन्हें कैसा पता चला कि मै पन्ना से हूं।मैंने तो आज तक अपने किसी भी डॉक्युमेंट्स में पन्ना का कोई जिक्र ही नही किया।

दीप्ति को यूं चौंका हुआ देखकर हेड आफिसर ने कहा, कम ऑन मिस दीप्ति, हम दुनिया की डिटेल्स निकाल सकते है तो क्या अपने आफिसर्स कि नहीं। और कहकर मुस्कराने लगे।

इस बात पर दीप्ति के साथ साथ बाकी ऑफिसर्स भी मुस्कराने लगे।🙂

हेड आफिसर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, चूंकि आप पन्ना से है तो बाकी आफिसर्स की अपेक्षा इस मिशन को आप बेहतर तरीके से अंजाम से सकती है। भले ही आप वहां कभी गई नहीं लेकिन फिर भी वहां के लोग आपको अपना समझेगें और इससे आपको काम करना आसान होगा। आपको वहां देविका शरण जी यानी अपने दादा जी की पोती ‘ताशु’ ( दीप्ति के दादा, दादी उसे इसी नाम से बुलाते   है) बनकर ही जाना है। और गांव कि लड़कियों की तरह ही बनकर रहना है।

‘इज दैट क्लियर’

यस सर। में आई से समथिंग, सर। दीप्ति ने बढ़ी अदब के साथ कहा।

यस, प्लीज़। हेड आफिसर ने इजाजत दी।

सर, एक्चुअली गांव वालो की नजर में देविका शरण जी पोती मर चुकी है।

दीप्ति की बात सुनकर सभी ऑफिसर्स चौंक गए और एक दूसरे की तरफ देखने लगे😲

दीप्ति ने अपनी बात जारी रखी, सर, कुछ व्यक्तिगत मामलों के कारण मुझे अपनी पहचान अपने ही गांव के लोगो से छिपाना पड़ा। मेरे दादा जी ने आज तक वहां किसी से नहीं बताया की मै जिंदा हूं। मुझे वहां सब लोग देविका शरण जी की बहन कि पोती ही जानते है।

सॉरी टू दृग माय पर्सनल इश्यूज इन टू इट। बट इट वाज नेसेसरी टू बी टोल्ड हियर। दीप्ति ने थोड़ी सफाई देते हुए कहा।

या, इट वाज रिएली इंपॉर्टेंट। सो, आप वहां देविका शरण जी की रिश्तेदार… मतलब उनके बहन की पोती बनकर जाना चाहती है? हेड ऑफशियेर ने सवालिए अंदाज में पूछा।

यस, सर। दीप्ति ने खुश होते हुए कहा।

ओके, नो प्रॉब्लम। बट मिशन शुड बी अचीव्ड।

इट विल डेफिनेटली बी सर। दीप्ति ने पूर्ण विश्वास के कहा।

हेड ऑफिसर ने सामने रखे मैप को दिखाते हुए बोलना शुरू किया -यहां देखिए ये गांव शहर से काफी दूर है। पन्ना तक आपको ट्रेन से जाना है और फिर आपको यहां से बस पकड़ना होगा मैप में एक जगह पे उंगली रखते हुए हेड आफिसर ने कहा। अपनी उंगली को आगे खींचते हुए ऑफिसर ने बोलना जारी रखा। बस आपको यहां तक ले जाएगी। यहां से करीब 1 किलो मीटर पैदल चलना होगा। फिर, आपको आगे फिर से बस से ही जाना होगा। यहां से बस सिर्फ रविवार को मिलती है। यानी आपको आज ही निकालना है। जिससे आप कल रविवार वाली बस पा सके नहीं तो एक हफ्ते तक वेट करना पड़ेगा।

और हैं, वो गांव गुंडों और बदमाशों के लिए बहुत बदनाम है इसलिए अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान दीजिएगा। आपकी अपनी सुरक्षा से लापरवाही मिशन की नाकामयाबी साबित हो सकती है। आपको उनसे किसी भी प्रकार से उलझने कि जरूरत नहीं है। एसीपी प्रताप रावत की टीम आलरेडी उस मिशन को हैंडल कर रही है। आपको सिर्फ अपने मिशन में फोकस करना है। 

इज दैट क्लियर।

यस, सर।

एनी क्वेरी? हेड ऑफिसर ने पूछा।

नो सर।

ओके, डिस्कशन इज ओवर। यू में लीव। बेस्ट ऑफ लक फॉर योर मिशन।

थैंक यू सर। कहकर दीप्ति बाकी ऑफिसर्स के साथ बाहर आ गई।

अब क्या चाहिए मैडम, आपकी मुह मांगी मुराद मिल गई। नेहा ने चहकते हुए दीप्ति से कहा।

हां, वो तो है। पन्ना जाने जा अच्छा खासा बहाना मिल ही गया। दीप्ति ने मुस्कुराते हुए कहा।

अच्छा ये बता ये एसीपी प्रताप रावत के बारे में कोई जानकारी है? दीप्ति ने नेहा की ओर देखते हुए उससे पूछा।

नहीं यार, कोई इंफॉर्मेशन नहीं है। दूसरे मिशंस की डिटेल्स डिस्क्लोज नहीं होती। फिर नेहा ने टाइम देखते हुए कहा- यार, आई एम गेटिंग लेट। मुझे अभी निकालना होगा। चल बाद में कॉल करती हूं। उसने दीप्ति को गले लगाते हुए कहा, बेस्ट ऑफ लक। मिलते है मिशन कि सफलता के बाद। 😍 बोलकर गाड़ी की चाभी पकड़ाते हुए चली गई। और दीप्ति कहीं दूर ख्यालों में खोती हुई अपने आप से ही बोली –

फाइनली, द डे हैज कम। 

 

अगला पार्ट जल्द ही

अगला पार्ट यहाँ पढ़े : अनजान सफर में मिला हमसफर: पार्ट 2 hindi romantic kahani

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